रविवार, 26 फ़रवरी 2017

देखो भैया चुनाव हे आया|



देखो भैया चुनाव हे आया |
लोकशाही का त्योहार हे आया |

बाजे ढोल- नगारे, ताल से ताल,
फुटे फटाके, उड़े रंग- गुलाल |
क्या होली- दिवाली एक-साथ हे आया ?
नहीं भैया चुनाव हे आया !
 लोकशाही का त्योहार हे आया |

कोई साड़ी बांटे, लैपटॉप बांटे,
कोई साइकल बांटे, कपडे बांटे |
क्या ऑनलाइन नया सेल हे आया?
नहीं भैया चुनाव हे आया !
 लोकशाही का त्योहार हे आया |

वोट डालने का उत्साह हे प्यारे,
हर जगह दिखती लंबी कतारे |
क्या फिरसे जिओ का सिमकार्ड हे आया?
नहीं भैया चुनाव हे आया !
 लोकशाही का त्योहार हे आया |

फिक्स वेतन में बढ़ोतरी आई ,
कर्मचारी के मन में खुशिया लाई |
सारे भत्ते मिलने लगे
बैंक बैलेंस सबके बढ़ने लगे |
क्या विदेशी कालाधन वापस हे आया?
नहीं भैया चुनाव हे आया !
 लोकशाही का त्योहार हे आया |

कोन सी जाती ,कोन सा पंथ हे,
कोन सवर्ण ओर कोन दलित हे
जाती धर्म में भूल गया था |
मुजको फिरसे याद दिलाया|
क्या कोई ज्ञानी पंडित हे आया?
नहीं भैया चुनाव हे आया !
 लोकशाही का त्योहार हे आया |

दागी आया , बेदागी आया ,
वोट मागने नेता घर घर आया |
कई यो का तो कांड भी आया|
क्या पुलिश में नया जोश हे आया?
नहीं भैया चुनाव हे आया !
 लोकशाही का त्योहार हे आया |


Disclaimer : This is not to support or oppose any government or political party. These are just thoughts put in poem to create simple humor.....Please do not take it seriously.☺

9 टिप्‍पणियां:

  1. padhi aapaki kavita manme ek khayal aaya kon he ye naya syar jisane sachai se vakef karaya chlta he yahi silasila badlati sarkar me ye sabko kavita ke madhyam se samjhaya khuda de apko aur kamiyabi achha laga apka vichar isliye apke kam ko sarhaya

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    1. વાહ તમે તો પોતે શાયર થઇ ગયા.
      Thanks for your appreciation

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    2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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    3. I salute your innovative thinking.

      रात भर आज नींद नहीं आती,
      बहुत सवेरे आँख खुल जाती ।
      क्यो बिटिया की शादी हे आई?
      नहीं भैया चुनाव हे आया !
      प्रीसाइडिंग आर्डर हे आया !

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