वो कहता था , वो कहता था। फिर भी जाने क्यु लड़ता था ?
वो जानता था , वो हारेगा। फिर भी जाने क्यु लड़ता था ?
याद मुझे महाभारत का मंजर , जब कृष्ण कर्ण से कहता था।
तु पाण्डव हे , तु पाण्डव हे। इस ओर ही तेरा घर हे।
बड़ी शान से कर्ण तभी , अपनी वाणी में बतलाता था ।
जिस ओर प्रभु नारायण हो , उस ओर भला हार कहा !
मित्र ऋण से बंधा हु ,इस लिये हार कर लड़ता हु।
वो जानता था , वो हारेगा। फिर भी जाने क्यु लड़ता था ?
सात महारथी रण में एक एक से बढ़के बल में ,
वो एक अकेला बालक था ,चक्रव्यूह तोड़ने आया था।
अंतिम साँस तक उसने हिमत अपनी नहीं हरी थी।
अतुलनीय बलवानो बीच उसकी वीरता भारी थी।
वो जानता था , वो हारेगा। फिर भी जाने क्यु लड़ता था ?
जिसने आधी दुनिया जीती थी , वो सिकंदर बलशाली था।
विश्व विजय की कामना से , भारत जीतने आया था।
सिकंदर की सेना को जिसने महीनो तक हँफाया था।
महावीर वो पुरु, हार कर स्वाभिमान नहीं गवाया था।
वो जानता था , वो हारेगा। फिर भी जाने क्यु लड़ता था ?
जब सोचता हु इन बातो को , तब पूछता हु मन ही मन में ,
इतना बता दे हे ईश्वर की ,हार कर क्यु लड़ते जग में ?
ईश्वर भी बतलाते मुझको , मन ही मन में पूछते मुझको ,
वो जानता था वो जल जायेगा फिर भी परवाना क्यु उड़ता था ?
वो जानता था वो मुर्जा जायेगा फिर भी फुल क्यु खिलता था ?
बस इसी लिये तो वो लड़ता था , वो लड़ता था !
हार जीत तेरा काम नहीं , फल पर तेरा अधिकार नहीं।
अपना कर्म तुझे अब करना हे , परिणाम से नहीं डरना हे।
मिड रिव्यु अब आया हे इतिहास फिर से दोहराया हे।
तु जानता नहीं परिणाम हे क्या ? फिर भी तुझको पढना हे।
बस इसी लिये सतीष तुझको , काम दिल से करना हे।
In the spirit of Preparation of GTU Mid Sem Review...
- Satish Prajapati
वो जानता था , वो हारेगा। फिर भी जाने क्यु लड़ता था ?
याद मुझे महाभारत का मंजर , जब कृष्ण कर्ण से कहता था।
तु पाण्डव हे , तु पाण्डव हे। इस ओर ही तेरा घर हे।
बड़ी शान से कर्ण तभी , अपनी वाणी में बतलाता था ।
जिस ओर प्रभु नारायण हो , उस ओर भला हार कहा !
मित्र ऋण से बंधा हु ,इस लिये हार कर लड़ता हु।
वो जानता था , वो हारेगा। फिर भी जाने क्यु लड़ता था ?
सात महारथी रण में एक एक से बढ़के बल में ,
वो एक अकेला बालक था ,चक्रव्यूह तोड़ने आया था।
अंतिम साँस तक उसने हिमत अपनी नहीं हरी थी।
अतुलनीय बलवानो बीच उसकी वीरता भारी थी।
वो जानता था , वो हारेगा। फिर भी जाने क्यु लड़ता था ?
जिसने आधी दुनिया जीती थी , वो सिकंदर बलशाली था।
विश्व विजय की कामना से , भारत जीतने आया था।
सिकंदर की सेना को जिसने महीनो तक हँफाया था।
महावीर वो पुरु, हार कर स्वाभिमान नहीं गवाया था।
वो जानता था , वो हारेगा। फिर भी जाने क्यु लड़ता था ?
जब सोचता हु इन बातो को , तब पूछता हु मन ही मन में ,
इतना बता दे हे ईश्वर की ,हार कर क्यु लड़ते जग में ?
ईश्वर भी बतलाते मुझको , मन ही मन में पूछते मुझको ,
वो जानता था वो जल जायेगा फिर भी परवाना क्यु उड़ता था ?
वो जानता था वो मुर्जा जायेगा फिर भी फुल क्यु खिलता था ?
बस इसी लिये तो वो लड़ता था , वो लड़ता था !
हार जीत तेरा काम नहीं , फल पर तेरा अधिकार नहीं।
अपना कर्म तुझे अब करना हे , परिणाम से नहीं डरना हे।
मिड रिव्यु अब आया हे इतिहास फिर से दोहराया हे।
तु जानता नहीं परिणाम हे क्या ? फिर भी तुझको पढना हे।
बस इसी लिये सतीष तुझको , काम दिल से करना हे।
In the spirit of Preparation of GTU Mid Sem Review...
- Satish Prajapati