शनिवार, 23 फ़रवरी 2019

Second Induction Training Bhopal



यादो को मन मे संजोये,
खुशियों से दिल को भिगोए |

IP-2 शुरू करने के कगर पे,
आ गए तालाबो के नगर में|

आते ही दुश्मन सामने खड़ा था,
संकट यह विकराल बड़ा था |
क्या रोम का जुलियस सीजर खड़ा था,
(नहीं भाई, ) रूम में बिगड़ा गीजर पड़ा था'|

विश्वेश्वर भगवान की मुश्किल से कृपा पाई,
सरन के तीसरे माले पे थोड़ी सी जगह पाई |

संजीत सर की संजीदगी हमें भाति थी,
टास्क ख़तम करने को हमें लुभाति थी |

जैन सर क्लास मे जब जब आते हे,
अपने युग के देवानंद नज़र आते हे |
हर शेसन मे एक ही सवाल मन में आते हे,
सरजी आप कहना क्या चाहते हे ?


अपने अंदर के शिक्षक को जानने लगे हम,
खोए हुए प्रशिक्षक को पहचानने लगे हम |
स्टूडेंट इवैल्यूएशन करने की ठानने लगे हम,
असेसमेंट में रूब्रिक्स जरुरी मानने लगे हम |

PO,CO,LOs, का यहाँ पर झाँसा हे,
हर फेकल्टी ने हमें उसमे फांसा हे |
हर शेसन के आउटकम का एक ही किस्सा हे,
एक्टिव verb आउटकम का जरुरी हिस्सा हे|

कुछ अरमान अधुरे बनकर रह गए,
कुछ ख्वाब कल्पना बनकर ढह गए|
जैसे बिना बल्ब के होल्डर बनकर रह गए,
भस्मआरती के प्लान फोल्डर बनकर रह गए|

-सतीषकुमार प्रजापति
-dedicated to all faculties at NITTTR,Bhopal and my co-trainees in Induction Phase 2.