सोमवार, 30 नवंबर 2015

छेल्लो दिवस SPIPA मा

आ गए हम,

घरबार छोड़कर आ गए हम,
चार महीने के लिये आ गए हम,
मंजिल तय करके आ गए हम,
लक्ष्य पाने के लिये आ गए हम,
रास्तो को जानने आ गए हम,
दिशाओ को खोजने आ गए हम,
exam पास कर आ गए हम,
govt. job पाने आ गए हम,
हसरतो को हकीकत में बदलने आ गए हम !

क्या क्या पढ़ लिया??

कोटवाल से constitution पढ़ लिया,
राजव्यस्था का राज पढ़ लिया,
economy का चीतार पढ़ लिया,
geography का 'G ' भी पढ़ लिया,
मिश्रा से तो Maths पढ़ लिया,
Slow Motion इंग्लिश भी पढ़ लिया,
भारद्वाज से अंग्रेजी पढ़ लिया,
विरल पटेल से भी तो पढ़ लिया,
शेर शायरी ओर सायन्स पढ़ लिया,
देश का इतिहास पढ़ लिया,
ओर अपना भविष्य पढ़ लिया !

अब तो बढ़ गया !

मेरा तो confidence बढ़ गया,
aptitude का स्कोर बढ़ गया,
Reasoning का reason भी बढ़ गया,
इंग्लिश का Vocab बढ़ गया,
पर साला SSC का cut off बढ़ गया,
PO में प्रिलिम बढ़ गया,
GPSC  का date बढ़ गया,
मेरा थोडा डिप्रेशन बढ़ गया,
दोस्तो का contact लिस्ट बढ़ गया,
whatsapp पर एक ग्रुप बढ़ गया!

अब नहीं मिलेगा,

बोर्ड पर विपुल का ड्राइंग नहीं मिलेगा,
कैंटीन में 25 में खाना नहीं मिलेगा,
सुबह १०-१२ newspapers नहीं मिलेगा,
स्पिपा लायब्ररी से बुक नहीं मिलेगा,
receess मे बोर्ड पर puzzle नहीं मिलेगा,
वो दोस्तो से सिखना नहीं मिलेगा,
बिना धक्के खाए diposit भी नहीं मिलेगा!

In the spirit of last at SPIPA RTC, Dedicated to all batch-mates.....
--Satish Prajapati

शुक्रवार, 13 मार्च 2015

फिर भी जाने क्यु लड़ता था ?

वो कहता था , वो कहता था। फिर भी जाने क्यु लड़ता था ?
वो जानता था , वो हारेगा।  फिर भी जाने क्यु लड़ता था ?

याद मुझे महाभारत का मंजर , जब कृष्ण कर्ण से कहता था।
तु पाण्डव हे , तु पाण्डव हे। इस ओर ही तेरा घर हे।
बड़ी शान से कर्ण तभी , अपनी वाणी में बतलाता था ।
जिस ओर प्रभु नारायण हो , उस ओर भला हार कहा !
मित्र ऋण से बंधा हु ,इस लिये हार कर लड़ता हु।
वो जानता था , वो हारेगा।  फिर भी जाने क्यु लड़ता था ?

 सात महारथी रण में एक एक से बढ़के बल में ,
वो एक अकेला बालक था ,चक्रव्यूह तोड़ने आया था।
अंतिम साँस तक उसने हिमत अपनी नहीं हरी थी।
अतुलनीय बलवानो बीच उसकी वीरता भारी थी।
वो जानता था , वो हारेगा।  फिर भी जाने क्यु लड़ता था ?

जिसने आधी दुनिया जीती थी , वो सिकंदर बलशाली था।
विश्व विजय की कामना से , भारत जीतने आया था।
सिकंदर की सेना को जिसने महीनो तक हँफाया था।
महावीर वो पुरु, हार कर स्वाभिमान नहीं गवाया था।
 वो जानता था , वो हारेगा।  फिर भी जाने क्यु लड़ता था ?

जब सोचता हु इन बातो को , तब पूछता हु मन ही मन में  ,
इतना बता दे हे ईश्वर की ,हार कर क्यु लड़ते जग में ?
ईश्वर भी बतलाते मुझको , मन ही मन में पूछते मुझको ,
वो जानता था वो जल जायेगा फिर भी परवाना क्यु उड़ता था ?
वो जानता था वो मुर्जा जायेगा फिर भी फुल क्यु खिलता था ?
बस इसी लिये तो वो लड़ता था , वो लड़ता था !

हार जीत तेरा काम नहीं , फल पर तेरा अधिकार नहीं।
अपना कर्म तुझे अब करना  हे , परिणाम से नहीं डरना हे।
मिड रिव्यु  अब आया हे इतिहास फिर से दोहराया हे।
तु जानता नहीं परिणाम हे क्या ? फिर भी तुझको पढना हे।
बस इसी लिये सतीष तुझको , काम दिल से करना हे।

In the spirit of Preparation of GTU Mid Sem Review...
- Satish Prajapati